Power of words… (शब्द-शक्ति…)

What is the word power?

  • Words are expression of emotions…
  • Words are expression of experience…
  • Words are a source of imagination, inspiration and strength…
  • Words are the difference between animals and humans…
  • Thoughts, the thoughts which are nor more than a crowd of words, revolutionize the brain, shake our conscience and soul, Even they are capable of turning the direction of life…
  • These words are helpful in will power enhancement…
  • That is the word, by pronouncing which an unknown person can be made an enemy as well as a friend…

-4 Jan 2001

Aware of death makes the life beautiful. If anyone should know that he is going to die tomorrow, merits seem to be enlightened in him. Who remember the death round the clock; he starts to catch the world from the side of truth. One who never forget the death, they are always with truth. so live every day like it’s our last day.

-30 Jan 2001

Who believe on their doing they do not trust anyone.

-13 Feb 2001

Each person has their own individual experience and these experiences are the basis of his future personality and character, whether they are happy or bitter experience. So each person should have the freedom of living his experience. No one should try to avoid his experiences nor should try to impose their experience on others.

-24 Feb 2001

शब्द-शक्ति…
शब्द शक्ति क्या है?

  • संवेदनाओं की अभिव्यक्ति हैं शब्द…
  • अनुभवों की अभिव्यक्ति हैं शब्द…
  • कल्पनाओं और प्रेरणा शक्ति का स्त्रोत हैं ये शब्द…
  • जानवर और इंसान के बीच का फर्क हैं ये शब्द…
  • विचार, वे विचार जो शब्द के झुण्ड के अलावा कुछ भी नहीं, मस्तिष्क में क्रांति ला देते हैं। विवेक और आत्मा को झिंझोड़ कर रख देते हैं। यहाँ तक कि जीवन की दिशा तक को मोड़ देने में समर्थ होते हैं…
  • आत्मबल बढ़ने में सहायक होते हैं ये विचार…
  • वह शब्द ही है जिसके उच्चारण मात्र से एक अनजान व्यक्ति को शत्रु भी बनाया जा सकता है और मित्र भी…
    -४ जनवरी २००१
    मौत का एहसास ज़िंदगी को खूबसूरत बना देता है। यदि किसी व्यक्ति को पता चल जाए कि वह कल ही मरने वाला है तो उसके अंदर की सारी अच्छाइयां जाग्रत होने लगती हैं। जो दिन रात मृत्यु का स्मरण रखता है, वह दुनिया के सत्य के पक्ष को पकड़ने लगता है। जो मौत को कभी नहीं भूलते वो हमेशा सच्चाई के साथ होते हैं इसलिए हर दिन ऐसे जियो जैसे कि वह हमारा आखिरी दिन हो।
    -३० जनवरी २००१
    जिन्हे अपने कर्मों पर विश्वास रहता है वे और किसी के भरोसे नहीं रहते।
    -१३ फरवरी २००१
    प्रत्येक व्यक्ति के अपने-अपने अलग-अलग अनुभव होते हैं और ये अनुभव ही उसके भावी व्यक्तित्व तथा चरित्र का आधार होते हैं, चाहे वे अनुभव सुखद हों अथवा कटु, इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को उसके अनुभव भोगने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। किसी को भी उसे उन अनुभवों से बचाने का प्रयास नहीं करना चाहिए और न ही अपने अनुभव दूसरों पर थोपने का प्रयास करना चाहिए।
    -२४ फ़रवरी २००१

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