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Discovery of the truth…16 (सत्य की खोज…16)

Adventure of the Truth…

Discovery of the truth…16

November 30, 2003, sun,

If you will take out the drain gutter worm forcedly and put in a good clean place, it will feel suffocated. It will not feel free to the fascination of groove until the level of its sense should not reach to distinguish the smell of groove and fragrance, until it can select the superior between the dirt and the velvet.

-9:05 a.m.

The access of sleep (culpa) in a person Indicates that it has deficiency of positive energy.

9:10 a.m.

The day, on which you will accept the reign of your heart, you will feel, the worldliness is a beggar’s life. I have got the sultanate of my heart.

Man so immerse in acting in the drama of this world that he forgets his original form and starts to live his false character instead of his original form and due to this acting he gets away from scenic beauty of his life and then tries to seek pleasure in fake beauty but you tell, can one get the fragrance and freshness of real flowers from paper flowers?

-9:45 a.m.

True innocence neither knows happiness, nor sorrow, nor fear.

-9: 45 a.m.

The dreams are the orders (unquenchable desires) of your waking mind which are visualized in graphics by your sleeping mind.

Sex is a beauty not obscene, people, who do not get to know it completely, they think it is obscene and those who do understand it fully, it manifests as a beauty for them.

I am seeing this beautiful conversion of sex into power. Sex has not fled from my life but has transformed into power and it has become even more beautiful.

-10:25 a.m.

Your infirmities are also yours. Do not ignore them. Accept them, treat them, know them, then they will not remain infirmities, they will become strength.

-10:33 a.m.

To forget something expresses that we did not give much importance to the matter, we did not give it primary level. The thing, which is at the primary level (very important) for us, we can never forget it, for instance, to wear undergarments after the bath.

Also we often don’t forget that thing, which is a part of our daily routine or to which we are accustomed. We do it mechanically, without remembering it, without focusing on it.

-10:42 a.m.

Religions, scripture, God are created to pose a question before a man but it is misfortune of man that he has assumed answer to the question.

-10: 50 p.m.

By giving ourselves physical pain such as hunger and thirst, we cannot discover the truth. By this we will create new complications and will involve in them. After indulging them we can move forward on the path of truth.

But we should remember also that taste-gluttony and excess of food that is a waste of your powers. Often we have food more than our need and dissipate our physical energy. This should be avoided to run on the path of truth.

-12: 02 p.m.

Now I am advancing gradually towards the thoughtlessness. Now I have to find the absolute power in the same emptiness.

-12: 22 p.m.

The thoughtlessness means freedom from invasion of ideas, freedom from invasion of remembrance of past memories, freedom from infirmities, freedom from knowledge, and freedom from conflict. The thoughtlessness means true waiting for the truth, true waiting for the absolute truth and true waiting for the absolute power.

-12:28 p.m.

Now there is only a zero before me.

Neither happiness nor sorrow… Neither beauty nor distortion…

Neither infirmity not strength… Neither knowledge nor ignorance…

Neither virtue, nor a sin…

Just a zero, zero and nothing…

-1: 10 p.m.

Now I am just eye, ear and pen. The mind is gradually becoming invisible. Now mind is realized only in dreams.

-1:17 p.m.

The thoughtlessness comes in two ways – one, after the invasion of ideas that came as delirium and the other, as the lack of ideas.

-1:34 pm.

The same wind blows out the fire and the same wind blows up and increases the fire. It is not a fault of the wind but it is the fault of fire. If the fire will be strong, it will blow up. If the fire will be week it will blow out.

-3:05 p.m.

Not the arguments, it is the self-observation, only the path of truth.

-3: 35 p.m.

What is going on inside, you have to observe it every time. This is the way of self-observation.

-3:02 p.m.

Why I am not happy, after getting all these things because my heart cries out to meet the ultimate power.

-10: 00 p.m.

Do not see that how long you have to walk. Look how far you have come.

-10: 02 p.m.


सत्य की खोज…16

30 नवंबर २००३


नाली के कीड़े को बलपूर्वक नाली से निकालकर अच्छी साफ़-सुथरी जगह रखोगे तो उसका दम घुटेगा। नाली का मोह उससे तब तक नहीं छूटेगा जब तक कि उसकी समझ उस स्तर तक न पहुँच जाए कि नाली की दुर्गन्ध और सुगंध में से श्रेष्ठता का चयन कर सके, गन्दगी और मखमल में से श्रेष्ठता का वरण कर सके।

-९:०५ a.m.

किसी व्यक्ति में निद्रा का बाहुल्य (प्रमाद) यह बताता है कि उसमे सकारात्मक ऊर्जा (पॉजिटिव एनर्जी) की कमी है।

९:१० a.m.

जिस दिन तुम अपने दिल की बादशाहत कबूल कर लोगे उस दिन से तुम्हे ये दुनियादारी फकीरी लगने लगेगी। मुझे अपने दिल की सल्तनत मिल चुकी है।

आदमी इस दुनिया के नाटक के अभिनय करने में इस कदर डूब जाता है कि अपना वास्तविक स्वरुप ही भूल जाता है और उस झूठे पात्र को ही अपना स्वरुप समझने लगता है। इस अभिनय के कारण वह नैसर्गिक सौन्दर्य से दूर हो जाता है और उस नकली सौन्दर्य में ही आनंद तलाशने लगता है। पर आप ही बताइये, भला कागज़ के फूलों से कहीं सच्चे फूलों की खुशबू और ताजगी मिल सकती है?

-९:४५ a.m.

सच्ची निर्दोषता न तो सुख जानती है, न दुःख और न ही डर।

-९:४५ a.m.

स्वप्न आपके जाग्रत मन के आदेश (अतृप्त इच्छाएं) हैं, जिन्हें आपका सुप्त मन ग्राफ़िक्स में विज़ुअलाइज़ (चित्रित) करता है।

काम (सेक्स) अश्लील नहीं सुन्दर है, जो लोग इसे पूरी तरह नहीं जान पाते, उन्हें यह अश्लील लगता है और जो लोग इसे पूरी तरह समझ लेते हैं उन्हें यह सुंदरता का बोध कराता है।

मैं देख रहा हूँ अपने अंदर काम के शक्ति में इस सुन्दर रूपांतरण को। काम ने मेरे जीवन से पलायन नहीं किया बल्कि शक्ति में रूपांतरित होकर और भी अधिक सुन्दर हो गया है।

-१०:२५ a.m.

तुम्हारी कमजोरियां भी तुम्हारी अपनी हैं। इनकी उपेक्षा मत करो। इन्हें स्वीकार करो, इन्हें समझो, इन्हें जानो फिर ये कमजोरियां, कमजोरियां नहीं रह जाएंगी, ताकत बन जाएंगी।

-१०:३३ a.m.

किसी बात को भूल जाना व्यक्त करता है कि हमने उस बात को अधिक महत्त्व नहीं दिया, प्राथमिक स्तर नहीं दिया। जो बात हमारे लिए प्राथमिक स्तर की (अति महत्त्व की ) होती है उसे हम कभी नहीं भूल सकते। मसलन नहाने के बाद अंतःवस्त्र (अंडरगारमेंट्स) पहनना।

उस बात को भी हम अक्सर नहीं भूलते जो हमारी दिनचर्या का हिस्सा है, जिसे करने के हम आदी हैं। उसे हम बिना ध्यान दिए, बिना याद रखे यंत्रवत करते जाते हैं।

-१०:४२ a.m.

धर्म, धर्मग्रन्थ, ईश्वर प्रश्न उत्पन्न करने के लिए बनाए गए पर मनुष्य का दुर्भाग्य है कि वह प्रश्नों को ही उत्तर मान बैठा है।

-१०:५० p.m.

अपने आप को भूख प्यास जैस शारीरिक कष्ट देकर हम सत्य की खोज नहीं कर सकते। इससे तो हम और नई-नई जटिलताएं पैदा कर उनमे उलझते चले जाएंगे। इन क्षुधाओं को तृप्त करने के बाद ही हम सत्य के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं।

पर साथ ही ये भी ध्यान रहे कि स्वाद- लोलुपता और भोजन की अधिकता आपकी शक्तियों का अपव्यय है। आवश्यकता स अधिक भोजन करके भी हम शारीरिक ऊर्जा का अपव्यय करते हैं। इस अति से भी बचना है सत्य के मार्ग पर चलने के लिए।

-१२:०२ p.m.

अब मैं धीरे-धीरे विचार शून्यता की तरफ बढ़ रहा हूँ। अब मुझे इसी शून्यता में परमशक्ति को खोजना है।

-१२:२२ p.m.

विचार शून्यता का मतलब है- विचारों के आक्रमण से मुक्ति, विगत स्मृतियों के स्मरण के आक्रमण से से मुक्ति, दुर्बलताओं से मुक्ति,ज्ञान से मुक्ति, संघर्ष से मुक्ति .विचार शून्यता है सच्ची प्रतीक्षा सत्य की,  सच्ची प्रतीक्षा परम सत्य की। सच्ची प्रतीक्षा परम शक्ति की।

-१२:२८ p.m.

अब सिर्फ एक शून्य है मेरे समक्ष।

न सुख है, न दुःख। न सौन्दर्य न विकृति।

न दौर्बल्य, न शक्ति। न ज्ञान, न अज्ञान।

न पुण्य, न पाप। सिर्फ एक शून्य, शून्य और कुछ नहीं।

-१:१० p.m.

अब मैं सिर्फ नेत्र, कान और कलम हूँ। मन धीरे-धीरे अदृश्य होते जा रहा है। अब मन अपना आभास सिर्फ स्वप्न में ही देता है।

१:१७ p.m.

विचार शून्यता दो तरह से आती है – एक विचारों के आक्रमण के बाद आने वाली मूर्छा के रूप में और दूसरी विचारों के अभाव के रूप में।

-२:३४ p.m.

वही हवा अग्नि को बुझा देती है और वही हवा अग्नि को भड़काकर बढ़ा देती है। दोष हवा का नहीं, अग्नि का है। यदि अग्नि प्रबल होगी तो भड़क उठेगी और दुर्बल होगी तो बुझ जाएगी।

-३:०५ p.m.

तर्क नहीं आत्म-अवलोकन ही एकमात्र मार्ग है सत्य का।

-३:३५ p.m.

आपके भीतर क्या चल रहा है, इसे हर समय देखना, इसके साक्षी हो जाना ही आत्मविश्लेषण है।

-३:५२ p.m.

मैं खुश क्यों नहीं रहता, इतना सब कुछ मिल जाने के बाद भी? क्योंकि मेरा मन रोता है उस परम शक्ति से मिलने के लिए।

-१०:०० p.m.

ये मत देखो कि कितनी दूर और चलना है। ये देखो कि कितनी दूर चल चुके हो।

-१०:०२ p.m.