Monthly Archives: February 2017

Discovery of the absolute truth … 2 (परमसत्य की खोज…2

Adventure of the Truth…

Discovery of the absolute truth … 2

December 3, 2003

Let’s start today’s journey with  last night’s dream-

Dream –

I’m walking out of the house on the main road. I buy two cigarettes from a roadside betel barrow, one smoke there and the other keep in the pocket. Walking ahead I arrive at a friend’s store. He also has two to three packs of cigarettes of different brands. He also offers a cigarette and despite of not being much desire and I accept and lit the cigarette. Then we come out and walk. Later, he buys cigarettes from a betel barrow and offers me again, I want to deny but can’t deny on his request and smoke another cigarette. Now we are about to cross the road, at the same time a procession passes. Banners, flags, dust and smoke flying vehicle are passing from near and we standing along the road are watching the convoy.

Interpretation of dream –

Cigarette is showing my weakness. I’m not able to give up this weakness in spite of my will.  That friend is my own negative image, who is offering me cigarettes as a weakness every time. And I want to deny but due to the lack of reasonable courage I cannot deny. He is offering me that weakness from everywhere and I’m going to accept it unwillingly.

Procession symbolizes worldly weakness and ignorance which is passing in front of us but we are not involved in it and we are viewing it by standing the roadside neutrally and want to go across the street i.e. we want to achieve absolute power absolute truth.

The result – my sleep has broken now, I am awoke. Cigarettes and coffee were my weaknesses. What is the work of weakness in the quest of absolute truth? Today I realized these weaknesses also and these have given up by me. I cut off my life’s last bond.

-11:08 a.m.

What an irony that people see the absolute truth (God) as a wonder and they want to remain it secret. One, who talks about the absolute truth, people look at him like he’s a strange zoo animal. People put them in the category of saints who speaks about the truth but do the hermits and monks only have the right of the truth? No, the truth is a universal right, yours and mine too. People have made the wrong assumption that absolute truth or the one who knows absolute truth cannot live in the world and one who talk things of this sort should go from this world, somewhere in the forest. He should hide himself in caves, on top of the Himalayas.

Can absolute truth be found by closing the eyes from so great truth (the world)? Can the absolute truth be found by fleeing from this world or fearing from the evils and ignorance of the truth? No, never, the evils of the world are not of the world but are your own evils, which are reflected in the world, and why the truth should leave this world? Falsehood will have to go, if not today then tomorrow.

If you want to know the truth then you don’t close your eyes towards falsehood (ignorance, disorder, infirmity). You will know completely falsehood then falsehood will no longer falsehood, it will become the truth.

-10:17 a.m.

People are embracing their weaknesses and ignorance like a mother monkey wander embracing her dead baby monkey. People want to remain children; they don’t want to be adult. They spend their lives by playing with the toys of falsehood, ignorance and weakness. They can’t leave phantasm of these toys and die in their childhood putting them in their heart. Like a child does not want to leave its habit of thumb sucking, same way people do not want to leave the phantasm of ignorance.

-10:45 a.m.

Increase in requirements is the only cause of weakness and sufferings. We embrace the suffering and infirmity by increasing our requirements.

-11:35 a.m.

If I am getting the salvation in return of one’s life salvation than the salvation is of no use to me.

-2:25 p.m.

Now I am not a slave of desires, Desires are now my maid.

-2:42 p.m.

If I can see my wife in power then you also can see the power in your wife. Your wife is the part of that power but neither she nor you know this truth. Try to find out, and after knowing let her realize this fact. If you have succeeded in doing so then there will be no lack in your life.  Neither happiness nor sorrow shall be there. Just a pleasure will remain, ‘Schchidananand’, the pleasure of true mind. When you’ll see that power in your wife, only then you will be able to love her truly. But remember, do not imagine, discover it in your life.

2:52 p.m.

Assuming him (God) almighty and oneself Insignificant powerless this world is being filled with Coward and impotent people. If your power is not true then how can be true that power? If you mighty then only he is omnipotent.

-4:10 p.m.

People do not want to accept their flaws and can’t gather the courage to give up them. People do not want to admit their ignorance and don’t want to take the risk of acquiring knowledge too so they seek for the middle way and spoil themselves.

-9:40 p.m.


परमसत्य की खोज…2

3 दिसम्बर २००३

आज की यात्रा का आरम्भ भी विगत रात्रि के स्वप्न से ही करते हैं-

स्वप्न – मैं घर से निकलकर मुख्य सड़क पर टहल रहा हूँ। सड़क के किनारे एक टपरे से मैं दो सिगरेटें खरीदता हूँ।, एक वहीँ पी लेता हूँ  और दूसरी जेब में रख लेता हूँ । आगे जाकर एक मित्र की दुकान पर पहुँचता हूँ। । उसके पास भी दो-तीन अलग-अलग ब्रांड के सिगरेट के पैकेट रखे हैं, वह भी सिगरेट ऑफर करता है और कुछ खास इच्छा न होते हुए भी मैं उससे सिगरेट लेकर जला लेता हूँ। इसके बाद हम दोनों घूमने निकलते हैं। आगे चलकर वह फिर एक पान ठेले से सिगरेट खरीदता है और मुझे फिर से ऑफर करता है, मैं इनकार करना चाहता हूँ पर उसके आग्रह के आगे इंकार नहीं कर पाता और एक और सिगरेट पी लेता हूँ। अब हम सड़क पार करने वाले हैं पर तभी कोई जुलूस निकल पड़ता है। बैनर, झंडे, धूल और धुआं उड़ाते वाहन निकलते जा रहे हैं और हम सड़क के इसी किनारे खड़े होकर उस काफिले को देख रहे हैं।

स्वप्नफल का अनुमान –

सिगरेट मेरी दुर्बलता को दर्शा रही है। मैं चाहकर भी इस दुर्बलता को नहीं छोड़ पा रहा हूँ। वह मित्र मेरा ही नकारात्मक व्यक्तित्व है, जो हर समय मुझे सिगरेट के रूप में दुर्बलता ऑफर कर रहा है और मैं यथोचित साहस के अभाव में अस्वीकार करना चाहते हुए भी अस्वीकार नहीं कर पा रहा हूँ। वह हर जगह से यह दुर्बलता मुझे ला ला कर दे रहा है और मैं न चाहते हुए भी इसे ग्रहण करते जा रहा हूँ।

जुलूस सांसारिक दुर्बलता और अज्ञानता का प्रतीक है जो हमारे सामने से गुजर रहा है, पर हम इसमें सम्मिलित नहीं हैं और तटस्थ होकर सड़क के किनारे खड़े होकर इसे देख रहे हैं और सड़क के उस पार जाना चाहते हैं याने परमशक्ति परमसत्य को पाना चाहते हैं।

परिणाम – अब मेरी नींद खुल चुकी है, मैं जाग चुका हूँ। सिगरेट और कॉफी मेरी दुर्बलता थी। परमसत्य की खोज में दुर्बलता का क्या स्थान? आज मैंने जान लिया इन दुर्बलताओं को भी और ये भी मुझसे छूट गईं। अपने जीवन का अंतिम बंधन भी काट दिया मैंने।

-११:०८ a.m.

कैसी विडम्बना है कि लोग परम सत्य (ईश्वर) के चमत्कार की दृष्टि से देखते हैं और इसे रहस्य ही बने रहने देना चाहते हैं। जो परमसत्य की बातें करता है, लोग उसकी तरफ ऐसे देखते हैं जैसे वह चिड़िया घर का कोई अजीबोगरीब जानवर हो। लोग सत्य की बातें करने वाले को साधु-संत की श्रेणी में रख देते हैं पर क्या सत्य पर केवल साधु सन्यासियों का ही अधिकार है? नहीं, सत्य पर सबका अधिकार है, आपका भी और मेरा भी। लोगों ने गलत धारणा बना ली है कि परमसत्य या परमसत्य को जानने वाला इस संसार में नहीं रह सकता और जो इस तरह की बातें करता है उसे इस दुनिया से चले जाना चाहिए, कहीं जंगल में। उसे छुप जाना चाहिए किन्ही कंदराओं में, हिमालय पर्वत की चोटी पर।

क्या इतने बड़े सत्य (संसार) से आँखें मूँद कर उस परमसत्य को पाया जा सकता है? क्या इस संसार के सत्य से भागकर या इसकी बुराइयों और अज्ञानता से डरकर उस परमसत्य को पाया जा सकता है? नहीं, कभी नहीं क्योंकि संसार की बुराइयां संसार की नहीं, तुम्हारी अपनी ही बुराइयां हैं, जो संसार में परिलक्षित होती हैं, प्रतिबिंबित होती हैं और फिर सत्य इस दुनिया को छोड़ कर क्यों जाए, जाना तो असत्य को ही पड़ेगा, आज नहीं तो कल।

सत्य को जानना चाहते हो तो असत्य (अज्ञान, विकार, दुर्बलता) से भी ऑंखें मत मूंदो। यदि असत्य को पूरी तरह जान लोगे तो असत्य असत्य नहीं रह जाएगा, सत्य हो जाएगा।

-१०:१७ a.m.

लोग अपनी कमजोरियों और अज्ञानता को उसी तरह अपने सीने से चिपकाए हुए हैं जैसे एक बंदरिया अपने मृत बच्चे को चिपकाए घूमती है। लोग बच्चे ही बने रहना चाहते हैं, बड़े ही नहीं होना चाहते। वे असत्य, अज्ञान और दुर्बलता के इन्ही खिलौनों से खेलते-खेलते जीवन गुजार देते हैं। वे इन खिलौनों का मोह नहीं छोड़ पाते और इन्हें कलेजे से लगाए बचपन में ही मर जाते हैं। जैसे अंगूठा चूसने वाला बच्चा अपनी आदत नहीं छोड़ना चाहता वैसे ही लोग अज्ञान के मोह को नहीं छोड़ना चाहते।

-१०:४५ a.m.

आवश्यकताओं में वृद्धि ही दुर्बलता और दुखों का कारण बनती है। हम अपनी आवश्यकताएं बढाकर दुखों और दुर्बलताओं को ही गले लगाते हैं।

-११:३५ a.m.

यदि मोक्ष किसी के प्राणों के बदले में मिल रहा हो तो वह मोक्ष मेरे किसी काम का नहीं।

-२: २५ p.m.


अब मैं इच्छाओं का दास नहीं रहा, अब इच्छाएं मेरी दासी हो गई हैं।

-२:४२ p.m.

अगर मैं शक्ति में अपनी पत्नी को देख सकता हूँ तो आप भी अपनी पत्नी में शक्ति को देख सकते हैं। आपकी पत्नी उस शक्ति का ही अंश है पर न तो वह जानती है यह सत्य और न ही आप। जानने की कोशिश कीजिये और जान लेने के बाद उसे भी अनुभूत कराइये। अगर आप ऐसा करने में सफल हो गए आपके जीवन में कोई कमी नहीं रह जाएगी, न दुःख रह जाएगा न सुख। बस एक आनंद बचा रहेगा। ‘सच्चिदानानंद’ सत्य चित्त का आनंद। जब आप अपनी पत्नी में उस शक्ति को देख लेंगे तभी आप उससे सच्चा प्रेम कर सकेंगे। मगर ध्यान रहे, कल्पना नहीं करें, प्रत्यक्ष करें।

-२:५२ p.m.

उसको (ईश्वर) को सर्वशक्तिमान और स्वयं को तुच्छ शक्तिहीन मान यह संसार कायरों और नपुंसकों से भरता जा रहा है। यदि तुम्हारी शक्ति सत्य नहीं है तो वह शक्ति भी सत्य कैसे हो सकती है? यदि तुम शक्तिमान हो तो ही वह शक्ति सर्वशक्तिमान है।

-४:१० p.m.

लोग अपने दोषों को स्वीकार करना भी नहीं चाहते और उन्हें छोड़ने का साहस भी नहीं जुटा पाते। लोग अपने अज्ञान को भी स्वीकार करना नहीं चाहते और ज्ञान प्राप्त करने का जोखिम भी नहीं उठाना चाहते इसलिए वे मध्यम मार्ग ढूंढते हैं, बीच का रास्ता तलाशते हैं और अपना अनर्थ कर लेते हैं।

-९:४० p.m.