Discovery of the absolute truth … 4 (परमसत्य की खोज…4)

Adventure of the Truth…

Discovery of the absolute truth … 4

December 5, 2003

It is people’s ignorance which does not let them to accept the knowledge; it tries to prove knowledge itself and tries to prove ignorance to the true knowledge.

Now I am getting acquainted with the supernatural abilities of the brain. Truly there is great power in Brahmacharya (celibacy).

There is fear in dreams but no pain

There is happiness in dreams but no taste, no juice.

Now there is neither happiness nor sadness in life, just a secret … the secret of life.

-8: 00 a.m.

This life, that death, this awakening, that sleep …

This reality, that dream …

Everything is a magic, a mystery.

These days, that night, this enjoy, that cry,

This sunshine, that shade …

Everything is a magic, a mystery.

Truly nature is a magic building.

-8:47 a.m.

Now the world looks unique, just like the fairy tale.

-9: 20 a.m.

Do not chase the mind, wherever it want to go, let it go, stay neutral and keep watching from a distance, after sometime, finding itself alone, it will return to you itself like a child.

-9: 30 a.m.

I am moving forward or returning.

-9: 37a.m.

Meeting with own, talking things, looks great.

-10: 45 a.m.

To a large extent, the feelings of the mother at the time of pregnancy remain responsible in the formation of future of a child.

-11: 50 a.m.

Ghazals, poems, teach us to enjoy sorrow.

-1: 55 p.m.

Today my mind has become a holy temple, in which there is a question in place of the idol of God – ‘What is the ultimate truth?’

-2: 00 p.m.

I am seeing that the power within me is converting in love.

-2: 05 p.m.

Brahmacharya (celibacy) is a subject on which very few people would have said full truth in open words. I would like to say this complete truth with full confidence on this topic that this is the only way to awaken the latent powers within a person. This is the only way through which man can know his imperceptible abilities but brahmacharya should be from the three the mind, the word and the deed and such celibacy is not impossible, this situation comes automatically, you just have to keep trying. You must have to prepare yourself mentally.

-4: 30 p.m.

(अंतर्यात्रा)

परमसत्य की खोज…4

5 दिसम्बर २००३

 

लोगों का अज्ञान ही उन्हें ज्ञान को स्वीकारने नहीं देता और स्वयं को ज्ञान तथा सच्चे ज्ञान को अज्ञान साबित करने की कोशिश करता है।

अब मैं मस्तिष्क की अतीन्द्रिय क्षमताओं से परिचित होने लगा हूँ। सचमुच ब्रह्मचर्य में बहुत बड़ी ताकत है।

स्वप्नों में डर होता है, दर्द नहीं।

सुख होता है, स्वाद नहीं, रस नहीं।

जीवन में अब न कोई खुशी है, न दुःख, बस एक रहस्य… जीवन का रहस्य।

-८:०० a.m.

ये जीवन, वो मृत्यु, ये जाग्रति, वो निद्रा…

ये वास्तविकता, वो स्वप्न…

सब कुछ एक जादू है, रहस्य है।

ये दिन, वो रात, ये आनंद, वो रुदन,

ये धूप, वो छांव…

सब कुछ एक जादू है, एक रहस्य है।

सचमुच प्रकृति एक जादू भवन है।

-८:४७ a.m.

अब संसार अनोखा लगता है, बिल्कुल परियों की कहानी जैसा।

-९:२० a.m.

मन का पीछा मत करो, वह जहाँ भी जाना चाहे, उसे जाने दो और तटस्थ होकर दूर से देखते रहो, कुछ देर बाद खुद को अकेला पाकर वह खुद ही किसी बच्चे की तरह तुम्हारे पास लौट आएगा।

-९:३० a.m.

मैं आगे बढ़ रहा हूँ या पीछे लौट रहा हूँ।

-९:३७ a.m.

काफी हद तक माँ की गर्भावस्था के समय की भावनाएं जिम्मेदार रहती हैं, उस बच्चे का भविष्य बनाने में।

-११:५० a.m.

दुःख का आनंद मनाना सिखाती हैं ग़ज़लें, कविताएं।

-१:५५ p.m.

आज मेरा मन एक पवित्र मंदिर हो गया है, जिसमे भगवान की मूर्ति की जगह एक प्रश्न है – ‘परमसत्य क्या है?’

-२:०० p.m.

मैं देख रहा हूँ कि मेरे भीतर की शक्ति प्रेम में परिवर्तित होती जा रही है।

-२:०५  p.m.

ब्रह्मचर्य एक ऐसा विषय है जिस पर बहुत कम लोगों ने खुले शब्दों में पूर्ण सत्य कहा होगा। मैं इस विषय पर पूरे आत्मविश्वास के साथ ये पूर्णसत्य कहना चाहूंगा कि यही एकमात्र मार्ग है व्यक्ति के भीतर की सुप्त शक्तियों को जागृत करने का। यही एकमात्र मार्ग है जिसके द्वारा मनुष्य अपनी अतीन्द्रिय क्षमताओं को जान सकता है परन्तु ब्रह्मचर्य मन, कर्म तथा वचन तीनो से होना चाहिए और ऐसा ब्रह्मचर्य बिलकुल असंभव नहीं, यह स्थिति अपने आप आती है, बस आपको प्रयास करते रहना होगा। मानसिक रूप से स्वयं को तैयार करना होगा।

-४:३० p.m.