Discovery of the absolute truth … 9 (परमसत्य की खोज…9)

Adventure of the Truth…

Discovery of the absolute truth … 9

December 10, 2003

Do not make spectacle of anybody’s grief by showing over sympathy for someone’s grief. Do not make him weak but increase his strength to bear his sufferings and let him fight with his sorrows.

-7:30 a.m.

Now don’t condemn the ignorance of people, don’t condemn to the ignorant, rather, peg away to get rid them with their ignorance, peg away in enhancing their power.

-7:40 a.m.

The ‘I’ inside me was my ignorance, after their departure, I am not able to realize the ‘I’. My consciousness is moving towards thoughtlessness.

-4:50 p.m.

There is a strange kind of peace, which is causing restlessness.

-5:05 p.m.

(अंतर्यात्रा)

परमसत्य की खोज…9

10 दिसम्बर 2003

किसी के दुःख में आवश्यकता से अधिक सहानुभूति दर्शाकर उसके दुःख का और तमाशा मत बनाओ। उसे और कमजोर मत बनाओ, बल्कि उसकी दुःख सहने की शक्ति को बढ़ाओ और उसे अपने दुखों से संघर्ष करने दो।

-7:30 a.m.

अब और मत कोसो लोगों के अज्ञान को, अज्ञानियों को, बल्कि तुरंत जुट जाओ उनके अज्ञान को दूर करने में, उनकी शक्ति को बढ़ाने में।

-7:40 a.m.

मेरे अंदर जो ‘मैं’ था, वह मेरा अज्ञान था, मेरी दुर्बलताएँ थीं। इनके चले जाने के बाद ‘मैं’ का बोध ही नहीं रहा, मेरी चेतना विचारशून्यता की तरफ बढ़ रही है।

-4:50 p.m.

एक अजीब तरह की शांति है, जो बेचैनी पैदा कर रही है।

-5:05 p.m.