Discovery of the absolute truth … 13 (परमसत्य की खोज…13)

Adventure of the Truth…

Discovery of the absolute truth … 13

December 14, 2003

The man is so happy even in his ignorance that he feels proud even sitting above the heap of ignorance (evil) as if he has achieved the height of the Everest.

-12:50 a.m.

In order to avoid their problems, People run away from their problems and hide in such a cave, which is an open mouth of a crocodile of death.

-7:15 a.m.

Higher truth is an explosion, after knowing which the ware does not remain the same, which he was before, he becomes transformed completely.

Not obeying the celibacy is to deceit ourselves, it is to deceive with our own soul and conscience.

-4:15 a.m.

My competition is with myself own and not anyone.

-11:55 a.m.

The animals and fools do not work till they are tortured, so here Gandhi ji’s non-violence theory does not apply.

-12:15 p.m.

The true worship is the feeling of gratitude towards that supreme God, but the worship of people is not a true gratitude, but a pretense of gratitude. When people do not want to know that superpower, then how can their gratitude be true, those who ignore him, how can love him? Those who can’t love him how can worship. People’s worship is not love but fear. They are afraid of that ultimate truth, they are afraid of that supreme power, so they worship him.

-12:30 p.m.

Power! Power! Power!

Power is the only truth. Truth is the only power.

-12:35 p.m.

My present life is the effect of the actions of my prior life. If my prior actions has been so high that I will get their return in this birth and my soul will reach the climax and merge in God, Then I will get salvation and if my previous deeds are not so effective, then my current karmas (deeds) will make my path of salvation so I can’t leave doing good deeds in any case I can’t leave the path of truth in any case because my extreme goal is to meet with absolute power (salvation).

-10:45 p.m.

The science of spirituality is not so difficult as hard as the ignorance of people has made it.

-10:50 p.m.

People often leave their hard work on their faith, but they do not know that fate is nothing but the result of past actions and further destiny will also be created by the current karma.

-11:00 p.m.

(अंतर्यात्रा)

परमसत्य की खोज…13

14 दिसम्बर 2003

आदमी अपने अज्ञान में भी इतना खुश रहता है कि अज्ञान (बुराइयों) के ढेर के ऊपर बैठकर भी गर्व महसूस करता है कि मानो उसने एवरेस्ट की ऊंचाई हासिल कर ली हो।

-12:50 a.m.

लोग अपनी समस्याओं से बचने के लिए, अपनी परेशानियों से भागकर ऐसी कंदरा (गुफा) में जा छिपते हैं जो काल रुपी मगरमच्छ का खुला हुआ मुंह होती है।

-7:15 a.m.

उच्चतर सत्य एक विस्फोट होता है जिसे जानने के बाद जानने वाला वह नहीं रह जाता, जो वह पहले रहता है, वह पूरी तरह रूपांतरित हो चुका होता है।

ब्रह्मचर्य का पालन न करना स्वयं से कपटाचरण करना है, अपनी आत्मा तथा विवेक से छल करना है।

-4:15 a.m.

मेरा कॉम्पीटीशन (स्पर्धा) खुद से है और किसी से नहीं।

-11:55 a.m.

जानवरों और मूर्खों को जब तक प्रताड़ित न किया जाए तब तक वे अपना काम नहीं करते अतः यहाँ गाँधी जी का अहिंसा का सिद्धांत लागू नहीं होता।

-12:15 p.m.

सच्ची पूजा कृतज्ञता का भाव है उस परमसत्य परमात्मा के प्रति, परन्तु लोगों की पूजा सच्ची कृतज्ञता नहीं बल्कि कृतज्ञता का ढोंग है। जब लोग उस परमशक्ति को जानना ही नहीं चाहते तो फिर उनकी कृतज्ञता सच्ची कैसे हो सकती है, जो लोग उसकी उपेक्षा करते हैं वे उससे प्रेम कैसे कर सकते हैं, जो लोग प्रेम नहीं कर सकते वे पूजा कैसे कर सकते हैं? लोगों की पूजा प्रेम नहीं भय है। वे डरते हैं उस परम सत्य से, उस परम शक्ति से, इसलिए वे उसकी पूजा करते हैं।

-12:30 p.m.

शक्ति! शक्ति! शक्ति!

शक्ति ही सत्य है। सत्य ही शक्ति है।

-12:35 p.m.

मेरा वर्तमान जीवन मेरे पूर्वजन्मों के कर्मों का प्रभाव है। यदि मेरे पूर्वकर्म इतने उच्चतर रहे होंगे कि उनका प्रतिफल मुझे इसी जन्म में मिल जाएगा और मेरी आत्मा चरमोत्कर्ष पर पहुँच कर विलीन हो जाएगी परमात्मा में, तो मैं मुक्त हो जाऊँगा और यदि मेरे पूर्व कर्म इतने प्रभावशाली नहीं हुए तो, मेरे वर्तमान कर्म ही मेरी मुक्ति का मार्ग बनाएँगे इसलिए मैं अच्छे कर्म करना किसी दशा में नहीं छोड़ सकता, सत्य का मार्ग किसी स्थिति में नहीं छोड़ सकता। क्योंकि मेरा चरम लक्ष्य परम शक्ति से मिलन (मुक्ति) है।

-10:45 p.m.

इतना गूढ़ और इतना कठिन नहीं है आध्यात्म का विज्ञानं, जितना लोगों की अज्ञानता (न जानने की इच्छा तथा उपेक्षा) ने बना रखा है।

-10:50 p.m.

लोग अक्सर अपने कठिन कामों को भाग्य के भरोसे छोड़ कर बैठ जाते हैं पर वे ये नहीं जानते कि भाग्य और कुछ नहीं बल्कि पूर्व कर्मों का परिणाम है तथा आगे का भाग्य भी वर्तमान कर्म ही बनाएँगे।     -11:00 p.m.