Discovery of the absolute truth … 18 (परमसत्य की खोज…18)

Adventure of the Truth…

Discovery of the absolute truth … 18

December 19, 2003

People consider…

Their ignorance as their knowledge,

Their faults as their virtue,

Their weakness as their power,

Their ego as their power,

Their weakness as their strength,

Their inefficiency as their misfortune,

Their cowardice as their smartness,

Their fear and timidity as their wisdom,

Their fugitiveness as their intelligence,

Their relative illusion as their happiness,

The truth of the life as sadness,

Illusion as the truth,

True joy as a miracle,

And truth as an impossible event.

-8:40 a.m.

Today the same strange power is running in my body. Today again the same power is vibrating my each pore. Today again I am being thrilled in the flow of the same power. Countless waves are rising up out of my heart; these are evanishing around my body, in my aura. Today, again temblor of power is rising from my heart, and   taking me in some other world. The vibrations of my brain are making me to feel like I am in a journey, as if I am wandering with my subtle body in some other world.

I do not believe that I am the same person who was a month ago. There is no question to believe because I am changed and I am changing constantly and my world is also changing with me.

Believe it or not, reality can also be beyond the imagination. Reality is infinitely more than imagination, I am realizing it today.

-9:30 p.m.

(अंतर्यात्रा)

परमसत्य की खोज…18

19 दिसम्बर 2003

लोग…

अपने अज्ञान को अपना ज्ञान,

अपने दोष को अपना गुण,

अपनी कमजोरी को अपनी शक्ति,

अपने अहंकार को अपनी शक्ति,

अपनी शक्ति को अपनी कमजोरी,

अपनी अक्षमता को अपना दुर्भाग्य,

अपनी कायरता को चालाकी,

भय तथा कापुरुषता को अक्लमंदी,

भगोड़ेपन को अपनी होशियारी,

सापेक्षिक भ्रमों को अपनी खुशियां,

जीवन की सच्चाई को दुःख,

असत्य (माया) को सत्य,

सच्चे आनंद को चमत्कार,

तथा सत्य को असंभव मानते हैं।

-8:40 a.m.

आज फिर वही विचित्र शक्ति दौड़ रही है मेरे शरीर में। आज फिर वही शक्ति मेरे रोम-रोम को स्पंदित कर रही है। आज फिर मैं रोमांचित हो रहा हूँ उसी शक्ति के प्रवाह में। अनगिनत तरंगें उठ रही हैं मेरे हृदयस्थल से और विस्तृत होकर फैलती जा रही हैं, विलीन होती जा रही हैं मेरे शरीर के चारों तरफ, आभामंडल में। आज फिर मेरे ह्रदय से उठ रहा है शक्ति का भूचाल और ले जा रहा है मुझे किसी दूसरी दुनिया में। मेरे मस्तिष्क के प्रकम्पन मुझे एक यात्रा का आभास करा रहे हैं, मानों मैं अपने सूक्ष्म शरीर के साथ किसी और ही दुनिया में विचरण कर रहा हूँ।

विश्वास ही नहीं होता कि मैं वही शख्स हूँ जो आज से एक माह पूर्व था। विश्वास करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता क्योंकि मैं बदल चुका हूँ और सतत परिवर्तित होता चला जा रहा हूँ और मेरी दुनिया भी मेरे साथ-साथ बदलती जा रही है। कोई विश्वास करे या न करे, वास्तविकता भी कल्पनातीत हो सकती है।

कोई विश्वास करे या न करे, वास्तविकता भी कल्पनातीत हो सकती है। वास्तविकता परिमाण में कल्पना से अनंत गुना बड़ी होती है, यह आज समझ में आ रहा है।

-9:30 p.m.