Discovery of the absolute truth … 21 (परमसत्य की खोज…21)

Adventure of the Truth…

Discovery of the absolute truth … 21

December 22, 2003

The way we think that the fall of the human race must have happened in the pig caste. In the same way the pig may also think that ‘the decline of pig caste must have happened in mankind.’ Just as we think, ‘we are living the best life in the birth of a human being’ and do not want to give up this life that is we do not want to die. It is possible that pigs must be thinking that ‘we are living the best life in the form of pigs on earth; God has sent us to this earth by giving us important work of removing man’s shit from the earth. They must be seeing even God as a pig. This way pigs do not want to leave their dirty lives too. Just as the pig does not want to reach its higher status (human state) by being cool in its life, in the same way, ordinary humans do not want to achieve their higher status by being happy in their life.

-7:15 A.M.

The tools without which it seemed impossible to spend the life first now have become useless; they have left from me automatically. The things, the imagination of which was giving the experience of the pleasure of heaven earlier, those things now seem to be children’s play. People’s things seem childish. People’s life seems to be childish. Am I really become so old?

-9:00 A.M.

Most part of our grief is the desire of unnecessary.

-9:20 A.M.

My life is made for the revelation of truth.

-9:22 A.M.

Motion is the power, the power is the motion. Conversion of motion is power and conversion of power is motion. Life is also a motion, death is also a motion. Motion is the eternal truth, stability is illusion.

-9:40 A.M.

Expectations from others give rise to misery; The reason for our misery is not to be satisfied our selfishness.

-11:40 A.M.

Our body is the source of infinite energy.

-11:55 A.M.

The principle of Christ, when someone slaps on one cheek then show him/her the second cheek, is not weakness or cowardice but a high level of courage. It is a sign of absence of anger, fear and weakness; it’s a sign of absence of feeling of honor and insult, it’s a sign of absence of physical ego, it’s a sign of the absence of meanness, it’s a sign of presence of vastness, it’s a sign of greatness, it’s the sign of the effect of the proximity of supreme power, it’s the sign of the furiousness of power, but my power has not reached this height right now, my courage has not been completely free from anger and fear.

Gautam Buddha’s boldness in front of Angulimal was the flow of the same great power, in front of which Angulimal’s audacity could not stay.

-9:55 P.M.

(अंतर्यात्रा)

परमसत्य की खोज…21

22 दिसम्बर 2003

जिस प्रकार हम सोचते हैं कि ‘मानव जाति का पतन सुअर जाति में होता होगा।’ उसी तरह सुअर भी सोचते होंगे कि ‘सुअर जाति का पतन मानव जाति में होता होगा।’ जिस प्रकार हम सोचते हैं कि ‘हम मानव के जन्म में सर्वश्रेष्ठ जीवन बिता रहे है’ और इस जीवन को छोड़ना नहीं चाहते अर्थात मरना नहीं चाहते। बहुत संभव है कि सुअर भी सोचते होंगे कि ‘हम पृथ्वी पर सुअर के रूप में सर्वश्रेष्ठ जीवन बिता रहे हैं, परमात्मा ने हमें पृथ्वी से मनुष्यों की गंदगी दूर करने का महत्त्वपूर्ण कार्य देकर इस पृथ्वी पर भेजा है।‘ वे परमात्मा को भी सुअर के रूप में देखते होंगे। इस तरह सूअर अपने गंदे जीवन को भी छोड़ना नहीं चाहते। जिस प्रकार सुअर अपने जीवन में मस्त होकर अपनी उच्चतर अवस्था (मानव अवस्था) को पाना नहीं चाहते उसी प्रकार साधारण मनुष्य भी अपने जीवन में मस्त होकर अपनी उच्चतर अवस्था को पाना नहीं चाहता।

-7:15 A.M.

जिन साधनों के बगैर पहले जिंदगी बिताना असंभव लगता था अब वे साधन भी व्यर्थ हो गए हैं, अपने आप ही मुझसे छूट गए हैं। जिन चीजों की कल्पना पहले स्वर्गिक आनंद की अनुभूति कराती थी, वे चीजें अब बच्चों का खेल लगती हैं। लोगों की बातें बचकानी लगती हैं। लोगों का जीवन बचपना लगता है। क्या मैं सचमुच इतना बड़ा हो गया हूँ?

-9:00 A.M.

हमारे दुःख का अधिकांश भाग अनावश्यक की कामना होता है।

-9:20 A.M.

मेरा जीवन सत्य के रहस्योद्घाटन के लिए बना है।

-9:22 A.M.

गति ही शक्ति है, शक्ति ही गति। गति का रूपांतरण शक्ति है, शक्ति का रूपांतरण गति। जीवन भी गति है, मृत्यु भी गति। गति ही शाश्वत सत्य है, विराम भ्रम है।

-9:40 A.M.

दूसरों से अपेक्षाएं ही दुखों को जन्म देतीं हैं, हमारे दुखों का अधिकांश कारण हमारे स्वार्थ की पूर्ति न होना है।

-11:40 A.M.

हमारा शरीर अनंत ऊर्जा का स्त्रोत है।

-11:55 A.M.

ईसा का किसी के एक गाल पर चांटा मारने पर दूसरा गाल दिखाने का सिद्धांत दुर्बलता या कायरता नहीं वरन उच्चस्तरीय साहस है। क्रोध, भय या दुर्बलता के अभाव का प्रतीक है, मान-अपमान की भावना के अभाव का प्रतीक है, भौतिक अहम् के अभाव का प्रतीक है, क्षुद्रता के अभाव का प्रतीक है, विशालता के भाव का प्रतीक है, विराटता के भाव का प्रतीक है, परमशक्ति के सान्निध्य के प्रभाव का प्रतीक है, शक्ति की प्रचंडता का प्रतीक है, पर मेरी शक्ति अभी इस ऊंचाई तक नहीं पहुँच पाई है, मेरा साहस अभी क्रोध और भय से पूर्णतः मुक्त नहीं हो पाया है।

गौतम बुद्ध की अंगुलिमाल के सामने प्रकट निर्भीकता उसी प्रचंड शक्ति का प्रवाह थी जिसके सामने अंगुलिमाल के दुस्साहस की दुर्बलता भी नहीं टिक सकी।

-9:55 P.M.