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Discovery of the absolute truth … 24 (परमसत्य की खोज…24 )

Adventure of the Truth…

Discovery of the absolute truth … 24

December 26, 2003

It is important that the ideal should be in front, even if it is unrecoverable.

-6:50 A.M.

Get drowned in your truth. If ignorance is true then get drowned in ignorance. If ‘false’ is true then get drowned in the false. If weakness is true then get drowned in weakness. If pain is true then get drowned in pain. If you completely embrace the immediate truth that is before you, then you will reach the eternal truth, you will experience your real power. You will experience the illusion of your weakness and anguish. As long as we do not know our power, pain and weaknesses suppress us, scare us, but when we know our true power, then they run away by fearing us.

-7:20 A.M.

Our situation in any pain or weakness is similar as it is of the blind beggar who is sitting with diamond of crores in his pouch and because of lack of knowledge of it, he is crying and begging and babbling that no one is helping him.

-7:25 A.M.

Surveys show that they spend the happiest life that are married and follows Charvak’s theory – ‘Take loan and enjoy the life’, and who take all good and bad experiences of the life. Those people lives happiest life, for which sex and adultery are entertainment and those who keep immersed themselves in alcohol and cigarettes day and night. This fact is absolutely true. There is no doubt about the truth of this fact. The survey is hundred percent true, but it is also true that their happiness is exactly like the pig rolling in mud.

After reaching lower level, worst things also gives joy and people tend to feel the same false happiness as supreme bliss.

-8:35 A.M.

Whether the power is positive or negative, in every situation it is power and is heavy on weakness.

-12:25 P.M.

Weakness is at a lower level than power at all costs, even if the power is negative.

-4:35 P.M.

In the law of nature effrontery is better than cowardice and fearfulness. The doer of injustice is better than the person who suffers the injustice because he is at higher level of power and courage than the victim.

-4:40 P.M.

People consider only materialism as achievements. There is no significance of spiritual achievement in their vision, just like the children’s happiness is limited to toys and sweets, it do not grow ahead of toys and sweets. It cannot be explained to the child that there may be a higher happiness also. It cannot be explained to the child that anything else can give more pleasure than toys and sweets.

-9:40 P.M.

You will be alone at the peak of your life. After gaining the spiritual achievements of your life, you will be alone who will enjoy it and who will consume it. Nobody can be a partner in true bliss of anybody. How unfortunate are those people who cannot loot this bliss and remain deprived of this bliss throughout their life.

-10:00 P.M.

(अंतर्यात्रा)

परमसत्य की खोज…24

26 दिसम्बर 2003

आदर्श का सामने रहना जरूरी है, भले ही वह अप्राप्य रहे।

-6:50 A.M.

अपने सत्य में डूब जाओ। यदि अज्ञान सत्य है तो अज्ञान में डूब जाओ। यदि ‘असत्य’ सत्य है तो असत्य में डूब जाओ। यदि दुर्बलता सत्य है तो दुर्बलता में डूब जाओ। यदि पीड़ा सत्य है तो पीड़ा में डूब जाओ। जो भी तात्कालिक सत्य तुम्हारे सामने है उसी को पूर्णतः अंगीकार कर लोगे तो तुम शाश्वत सत्य तक पहुँच जाओगे, अपनी वास्तविक शक्ति का अनुभव कर लोगे। दुर्बलता और पीड़ा के भ्रम होने का अनुभव कर लोगे। जब तक हम अपनी शक्ति को नहीं जान पाते, तब तक वेदनाएं और दुर्बलताएँ हमें दबाती हैं, डराती हैं, परन्तु जब हम अपनी वास्तविक शक्ति को जान लेते हैं तब ये हमसे डरकर दूर भाग जाती हैं।

-7:20 A.M.

किसी पीड़ा या दुर्बलता के आगे हमारी स्थिति ठीक वैसी ही होती है जैसी उस अंधे भिखारी की होती है जो अपनी झोली में करोड़ों के हीरे रखकर बैठा है और उसका ज्ञान न होने के कारण वह रोता, गिड़गिड़ाता भीख मांग रहा है और प्रलाप कर रहा है कि कोई उसकी मदद नहीं करता।

-7:25 A.M.

सर्वे बताते हैं कि सबसे अधिक खुशहाल जीवन वे बिताते हैं जो विवाहित हैं और चार्वाक के सिद्धांत – ‘ऋणम कृत्वा घृतम पीवेत’ पर चलते हुए दुनिया के अच्छे बुरे सभी मजे लेते हैं। सबसे अधिक खुशहाल जीवन उनका होता है, जिनके लिए सेक्स और व्यभिचार मनोरंजन होता है और जो शराब और सिगरेट में रात दिन खुद को डुबाए रखते हैं। बिलकुल सत्य है यह बात। इस बात की सत्यता पर कोई संदेह नहीं। सौ फ़ीसदी सच है यह सर्वे, पर साथ ही यह बात भी सत्य है कि उनकी ये खुशहाली ठीक वैसी ही होती है जैसी कीचड में लोटते हुए सुअर की। निम्नतर स्तर पर पहुँचने के बाद बुरी से बुरी चीजें भी आनंद प्रदान करती हैं और लोग इसी मिथ्या आनंद को परम आनंद मान  बैठते हैं।

-8:35 A.M.

शक्ति चाहे सकारात्मक हो चाहे नकारात्मक, हर स्थिति में शक्ति होती है और दुर्बलता पर भारी होती है।

-12:25 P.M.

दुर्बलता हर कीमत पर शक्ति से निम्नतर स्तर पर ही होती है, चाहे वह शक्ति नकारात्मक ही क्यों न हो।

-4:35 P.M.

कायरता और भीरुता से दुस्साहस ही अच्छा है। डरकर अन्याय सहने वाले से अन्याय करने वाला ही अच्छा है क्योंकि वह शक्ति और साहस सहने वाले से ऊंचा है।

-4:40 P.M.

लोग भौतिकवाद को ही उपलब्धियां मानते हैं। आध्यात्मिक उपलब्धि का उनकी दृष्टि में कोई महत्व नहीं होता, ठीक वैसे ही जैसे बच्चे की खुशियां खिलौनों तथा मिठाइयों तक ही सीमित रहती है, उनके आगे नहीं बढ़ पाती। उसे नहीं समझाया जा सकता कि इससे उच्चतर खुशियां भी हो सकती हैं। उसे नहीं समझाया जा सकता कि खिलौनों और मिठाइयों से उत्तम आनंद कोई और चीज भी दे सकती है।

-9:40 P.M.

अपने जीवन की चरम ऊंचाइयों पर आप नितांत अकेले होंगे। अपने जीवन की आध्यात्मिक उपलब्धियों को पाने के बाद उसका आनंद लूटने वाले, उसका उपभोग करने वाले भी आप अकेले ही होंगे। सच्चे आनंद में कोई किसी का सहभागी नहीं हो सकता। कितने बदकिस्मत होते हैं वो लोग जो इस आनंद को नहीं लूट पाते और अपने पूरे जीवन भर इस आनंद से वंचित रहते हैं।

-10:00 P.M.